किडनी (Chronic kidney disease) से जुड़ी बीमारियों को 'साइलेंट किलर' कहा जाता है (Image: Freepik)

क्या है सामाजिक प्रगति सूचकांक, बिहार-झारखंड सबसे पीछे, जानिए आपका राज्य किस नंबर पर

अन्य राज्यों की तुलना में बिहार के आर्थिक रूप से कमजोर होने के कई कारण हैं. जिसमें जनसंख्या, कृषि पर निर्भर आर्थिक जीवन, प्राकृतिक आपदा, औद्योगिक पिछड़ापन शामिल है.

By: अलका राशि | Updated at : 21 Dec 2022 04:36 PM (IST)

सामाजिक प्रगति सूचकांक में बिहार और झारखंड सबसे पीछे

देश में कुछ रैंकिंग और रिपोर्ट्स ऐसे जारी किए जाते हैं, जिससे राज्यों के बीच बेहतरी के लिए प्रतिस्पर्धा पैदा की जा सके. ऐसी डबल नीचे संकेतक ही एक रिपोर्ट है- सामाजिक प्रगति सूचकांक यानी एसपीआई. इस रिपोर्ट को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) जारी करती है. साल 2022 का एसपीआई डबल नीचे संकेतक डबल नीचे संकेतक रिपोर्ट 20 दिसंबर को जारी किया गया.

इस रिपोर्ट में कई मापदंडों को ध्यान में रखा गया है और ये तय किया गया है कि डबल नीचे संकेतक सामाजिक प्रगति के मामले में कौन सा राज्य किस स्तर पर है. रिपोर्ट में पुडुचेरी, लक्षद्वीप और गोवा को सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला राज्य बताया गया है. वहीं बिहार और झारखंड सबसे पीछे है.

क्या है सामाजिक प्रगति सूचकांक?
सामाजिक प्रगति सूचकांक एक रिपोर्ट है, जिसमें देश के सभी राज्यों के प्रदर्शन को आंका जाता है. यह आकलन तीन बुनियादी मानवीय जरूरतों, बेहतर जीवनशैली के आधार और अवसरों के लिहाज से किया जाता है. इस सूचकांक को तैयार करते वक्त सर्वे कर पता लगाया जाता है कि किन राज्यों में पोषण और स्वास्थ्य देखभाल, जल और स्वच्छता, व्यक्तिगत सुरक्षा और रहने की स्थिति कैसी है.

इसमें कैसे किया जाता है सर्वे?
इस रिपोर्ट में 36 राज्यों एवं संघ-शासित प्रदेशों और देश के 707 जिलों को सामाजिक प्रगति के विभिन्न मानकों पर उनके प्रदर्शन के आधार पर आंका जाता है. एसपीआई स्कोर के आधार पर देश के सभी राज्यों और जिलों को सामाजिक प्रगति के छह स्तरों के तहत स्थान दिया गया है. ये 6 स्तर हैं बहुत उच्च सामाजिक प्रगति, उच्च सामाजिक प्रगति, ऊपरी मध्य सामाजिक प्रगति, निम्न मध्य सामाजिक प्रगति, निम्न सामाजिक प्रगति और बहुत कम सामाजिक प्रगति हैं.

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सर्वे के दौरान सभी राज्यों में रहने वालों के जीवन स्तर के मामले में मूल ज्ञान, सूचना तक पहुंच, संचार, स्वास्थ्य और पर्यावरण की गुणवत्ता भी देखी जाती है. सर्वे के दौरान अवसर के मामले में व्यक्तिगत आजादी, निजी अधिकार और चयन, समावेशन और आधुनिक शिक्षा के पहुंच की स्थिति को मापा जाता है.

सर्वे में इस बार क्या है?
रिपोर्ट के अनुसार सभी राज्यों की तुलना में पुडुचेरी का एसआईपी स्कोर सबसे ज्यादा 65.99 रहा. दूसरे स्थान पर 65.89 स्कोर के साथ लक्षद्वीप रहा और तीसरे स्थान पर स्कोर के साथ गोवा का नाम दर्ज है. वहीं आइजोल (मिजोरम), सोलन और शिमला (हिमाचल प्रदेश) सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले तीन जिले हैं.

एसआईपी स्कोर 43.95 के साथा लिस्ट में सबसे कम प्रगति वाले राज्य के रूप में झारखंड का नाम दर्ज किया गया है. वहीं बिहार नाम भी का भी सबसे कम प्रगति वाले राज्यों में दर्ज किया गया है. बिहार का एसआईपी स्कोर 44.47 दर्ज किया गया है.

जानिए आपका राज्य किस नंबर पर

सामाजिक प्रगति सूचकांक के अनुसार पुडुचेरी, लक्षद्वीप, गोवा, सिक्किम, मिजोरम, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, केरल और जम्मू कश्मीर को प्रगति के मामले में अन्य राज्यों से अच्छा प्रदर्शन करने वाला राज्य बताया गया है. इन राज्यों को लिस्ट के टॉप 10 में स्थान दिया गया है. वहीं उत्तर प्रदेश, ओडिशा, मध्य प्रदेश, असम, बिहार, झारखंड का नाम लिस्ट में सबसे निचले स्तर पर रहा.

बिहार सबसे पीछे क्यों, 3 प्वाइंट्स

  • केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के मुताबिक- बिहार में 33.74 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा के नीचे रहते हैं और अगर वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) की बात करें तो यह फीसदी बढ़कर 52.5 हो जाता है.
  • बिहार में 42 फीसदी 5 वर्ष के कम उम्र के बच्चे कुपोषण के शिकार हैं. 15 वर्ष डबल नीचे संकेतक से ऊपर के लोगों की साक्षरता दर 64.7% है. ये भी एक बड़ी वजह है.
  • पटना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर विक्षवेक के मुताबिक कृषि पर निर्भर आर्थिक जीवन और प्राकृतिक आपदा भी बड़ी वजह है, इसमें पीछड़ने का. उत्तर बिहार के लोग बाढ़ और दक्षिण बिहार के लोग हर साल सुखाड़ डबल नीचे संकेतक से परेशान रहता है.

फिर इसका निदान क्या है?
प्रोफेसर विवेक कहते हैं- बिहार के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए कृषि तकनीक और आधारभूत संरचना के विकास पर काम करने की जरूरत है. इसके अलावा राज्य में शिक्षा एवं जागरूकता की भी कमी है. इस सभी के लिये प्रभावकारी कदम उठाए जाते हैं तो ही बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन को दूर किया जा सकता है.

Published at : 21 Dec 2022 01:45 PM (IST) Tags: jharkhand Bihar News Plus Social Progress Imperative हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें abp News पर। सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट एबीपी न्यूज़ पर पढ़ें बॉलीवुड, खेल जगत, कोरोना Vaccine से जुड़ी ख़बरें। For more related stories, follow: News in Hindi

वैश्विक भुखमरी सूचकांक में पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका से भी पिछड़ा भारत; जानें- कितने नंबर पर पहुंचा?

भूख और कुपोषण पर नजर रखने वाले ग्लोबल हंगर इंडेक्स की वेबसाइट ने शनिवार को यह जानकारी दी कि चीन, तुर्की और कुवैत सहित 17 देशों ने 5 से कम जीएचआई स्कोर के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया है.

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वैश्विक भुखमरी सूचकांक में पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका से भी पिछड़ा भारत; जानें- कितने नंबर पर पहुंचा?

भारत 121 देशों के ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) 2022 में 101 से 107वें स्थान पर खिसक गया है. अब इस सूचकांक में पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका भी भारत से आगे हो गया है.

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भूख और कुपोषण पर नजर रखने वाले ग्लोबल हंगर इंडेक्स की वेबसाइट ने शनिवार को यह जानकारी दी कि चीन, तुर्की और कुवैत सहित 17 देशों ने 5 से कम जीएचआई स्कोर के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया है.

कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 8 साल में 2014 के बाद से हमारा स्कोर खराब हुआ है. उन्होंने ट्विटर पर पूछा, "माननीय प्रधान मंत्री कब बच्चों के बीच कुपोषण, भूख और लाचारगी जैसे वास्तविक मुद्दों का समाधान करेंगे?"

When will the Hon'ble PM address real issues like malnutrition, hunger, and stunting and wasting among children?

22.4 crore people in India are considered undernourished

India's rank in the Global Hunger Index is near the bottom -- 107 out of 121 countries

— P. Chidambaram (@PChidambaram_IN) October 15, 2022

आयरिश सहायता एजेंसी कंसर्न वर्ल्डवाइड और जर्मन संगठन वेल्ट हंगर हिल्फ़ द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किए गए इस रिपोर्ट में भारत में भूख के स्तर को "गंभीर" करार दिया गया है.

वर्ष 2021 में भारत 116 देशों की सूची में 101 स्थान पर था लेकिन इस बार 121 देशों की लिस्ट में भारत छह अंक लुढ़ककर 107वें नंबर पर पहुंच गया है. इसके साथ ही भारत का जीएचआई स्कोर भी गिर गया है - 2000 में यह 38.8 था जो 2014 और 2022 के बीच 28.2 - 29.1 के बीच पहुंच गया है.

भारत की रैंकिंग गिरने के बाद सरकार ने पिछले साल इस रिपोर्ट की आलोचना करते हुए कहा था कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स की गणना के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पद्धति अवैज्ञानिक है.

इंडेक्स जारी करने वाले संगठन के मुताबिक, श्रीलंका 64, नेपाल 81, बांग्लादेश 84 और पाकिस्तान 99 वें नंबर पर है. दक्षिण एशिया में केवल अफगानिस्तान ही भारत से पीछे है. अफगानिस्तान इस इंडेक्स में 109 नंबर पर है. गौर करने वाली बात यह है कि इस इंडेक्स में सूडान, इथोपिया, रवांडा, नाइजीरिया, केन्या, गाम्बिया, नामीबिया, कम्बोडिया, म्यांमार, घाना, इराक, वियतनाम, लेबनान, गुयाना, यूक्रेन और जमैका जैसे देश भी भारत से कहीं ऊपर हैं.

Stock Market: उतार-चढ़ाव के बीच सूचकांक हरे निशान में, निफ्टी 18,300 के नीचे

नई दिल्ली, । बुधवार की तेज गिरावट के डबल नीचे संकेतक बाद शेयर बाजार में आज बेहतर कारोबार हो रहा है। घरेलू इक्विटी बाजार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 397.14 अंक बढ़कर 61,464.38 डबल नीचे संकेतक अंक पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 119.65 अंक बढ़कर 18,318.75 अंक पर पहुंच गया।

सकारात्मक वैश्विक रुझानों के बीच बाजार में उच्च कारोबार हो रहा है। वैश्विक बाजार में मजबूती के रुख के बीच पिछले सत्र की गिरावट के बाद गुरुवार को शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख के साथ कारोबार शुरू हुआ।

टॉप गेनर्स और लूजर्स

सेंसेक्स पैक से, सन फार्मा, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, इंफोसिस, भारती एयरटेल, कोटक महिंद्रा बैंक, विप्रो, बजाज फाइनेंस, आईटीसी और अल्ट्राटेक सीमेंट प्रमुख गेनर्स रहे। इंडसइंड बैंक, टाटा मोटर्स, बजाज फिनसर्व, एक्सिस बैंक, टाटा स्टील, लार्सन एंड टुब्रो, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एनटीपीसी और भारतीय स्टेट बैंक पिछड़ने वालों में से थे।

दुनिया के बाजारों का हाल

एशिया में सियोल, टोक्यो शंघाई और हांगकांग में इक्विटी बाजार हरे रंग में कारोबार कर रहे थे। बुधवार को अमेरिकी बाजार बढ़त के साथ बंद हुए थे। मेहता इक्विटीज लिमिटेड के प्रकाश तापसे ने कहा कि चीन में बढ़ते COVID मामलों और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मंदी की आशंकाओं पर बढ़ती अनिश्चितता के कारण पिछले कुछ सत्रों में देखी गई तेज इंट्रा-डे अस्थिरता से निवेशकों को सावधान रहने की जरूरत है।

बुधवार को बीएसई बेंचमार्क 635.05 अंक या 1.03 प्रतिशत गिरकर 61,067.24 पर बंद हुआ। निफ्टी 186.20 अंक या 1.01 फीसदी की गिरावट के साथ 18,199.10 पर बंद हुआ।

शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत

विदेशी बाजारों में डॉलर के कमजोर होने और घरेलू इक्विटी बाजारों में शुरुआती बढ़त से बृहस्पतिवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत हुआ। विदेशी मुद्रा डीलरों के अनुसार, कच्चे तेल की मजबूत कीमतों और पूंजी बाजार से विदेशी मुद्रा की निकासी ने रुपये की बढ़त को सीमित कर दिया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया पिछले बंद भाव 82.84 के मुकाबले 82.78 पर खुला।

उधर छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती का आकलन करने वाला डॉलर सूचकांक 0.28 प्रतिशत गिरकर 103.87 अंक पर आ गया। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा 0.45 प्रतिशत बढ़कर 82.57 डॉलर प्रति बैरल हो गया।

डबल नीचे संकेतक

दिल्ली. भारतीय शेयर बाजार में आज सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन की शुरूआत में भारी बिकवाली के चलते कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों इंडेक्स में बड़ी गिरावट दिख रही है. आज के कारोबार में सेंसेक्स 350 अंकों से ज्यादा टूट गया है. जबकि निफ्टी भी 18300 अंकों के स्तर के करीब आ गया है.

आज शेयर बाजार के खुलते ही चौतरफा बिकवाली है. निफ्टी पर ऑटो, आईटी, मेटल, फार्मा और रियल्टी इंडेक्स आधे प्रतिशत से ज्यादा कमजोर हुए हैं. जबकि बैंक, फाइनेंशियल, एफएमसीजी सहित अन्य इंडेक्स में भी गिरावट देखने को मिल रही है. फिलहाल सेंसेक्स में 352 अंकों की कमजोरी है और यह 61,454 अंकों के स्तर पर कारोबार कर रहा है. जबकि निफ्टी 102 अंक टूटकर 18319 अंकों के लेवल पर ट्रेड कर रहा है.

आज हैवीवेट शेयरों में बिकवाली दिख रही है. वहीं सेंसेक्स 30 के सभी 30 शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे हें. आज के शेयर डबल नीचे संकेतक बाजार खुलते ही निवेशकों के 2 लाख करोड़ रुपये डूब गए. सोमवार को बाजार बंद होने पर बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 2,87,90,710.06 करोड़ रुपये था, जो आज 9:35 बजे यह घटकर 2,85,53,792.12 करोड़ रुपये रह गया.

Kidney Health: किडनी फेल होने से पहले शरीर देने लगता है ऐसे संकेत, एक्सपर्ट से जानिए कैसे रखें गुर्दे का ख्याल

Chronic kidney disease: लाखों लोग किडनी से जुड़ी डबल नीचे संकेतक बीमारियों के साथ जीवन जी रहे हैं और उन्हें इस बात की बिलकुल भी जानकारी नहीं है।

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किडनी (Chronic kidney disease) से जुड़ी बीमारियों को 'साइलेंट किलर' कहा जाता है (Image: Freepik)

मानव शरीर में दो किडनी यानी गुर्दे होते हैं जिनका मुख्य काम यूरिया, क्रिएटिनिन, ऐसिड्स जैसे खराब तत्वों को रक्त से फिल्टर करना यानी निकालना और पेशाब बनाना होता है। किडनी ही हमारे शरीर में पानी का संतुलन बरकरार रखती है और कई ऐसे हॉर्मोन्स का उत्पादन व नियंत्रण करती है जो ब्लड प्रेशर, हड्डियों का स्वास्थ्य और हीमोग्लोबिन बनाने के लिए आवश्यक होते हैं।

फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा के एडिशनल डायरेक्टर व हेड नेफ्रोलॉजी व किडनी ट्रांसप्लांट विभाग की डॉ. अनुजा पोरवाल ने जनसत्ता डॉट कॉम से बातचीत में बताया कि, “ऐसे कई सारे चेतावनी संकेत होते हैं जो किडनी की बीमारी की ओर इशारा करते हैं लेकिन अधिकतर मामलों में इन्हें नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है या फिर कुछ और मान लिया जाता है।” डॉक्टर द्वारा बताए गए कुछ चेतावनी संकेत नीचे दिए गए हैं जो किडनी से जुड़ी बीमारियों को जल्द पहचानने में मदद कर सकते हैं-

किडनी फंक्शन में खराबी होने पर शरीर में दिखते हैं ये 10 संकेत

कमज़ोरी या जल्दी थकना: दुनियाभर में यह किडनी से जुड़ी बीमारियों का लक्षण है। जैसे-जैसे रीनल डिस्फंक्शन यानी किडनी में खराबी बढ़ती है यह लक्षण भी अधिक गंभीर हो जाता है। इसकी मुख्य वजह ब्लड में टॉक्सिन्स व अशुद्धियों का जमा होना है।

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भूख कम होना: टॉक्सिन्स के जमा होने से व्यक्ति डबल नीचे संकेतक की भूख कम हो जाती है। इसके अलावा, किडनी से जुड़ी बीमारी की गंभीरता बढ़ने के साथ ही व्यक्ति का स्वाद भी बदलता है और मरीज़ अक्सर इसे मेटॅलिक बताते हैं जिससे उनकी भूख कम होती चली जाती है।

सुबह उल्टी होना या उबकाई आना: किडनी के खराब होने के शुरुआती संकेतों में से एक है सुबह उठते ही उल्टी होना या उबकाई आना। इससे मरीज़ की भूख भी कम होने लगती है। बीमारी के एंड स्टेज में मरीज़ को दिन में कई बार उल्टी होती है और उसकी भूख पूरी तरह खत्म हो जाती है।

एनीमिया : शरीर में अकारण एनीमिया होना किडनी की बीमारी का सबसे आम लक्षण है। एनीमिया होने की गई वजहें हो सकती हैं जैसे किडनी में बनने वाले एरीथ्रोप्रोटीन का लेवल कम होना, आयरन का लेवल घटना या शरीर में टॉक्सिन्स का जमा होना।

हाई ब्लड प्रेशर: किडनी की बीमारी होने का एक संकेत हाइ ब्लड प्रेशर भी होता है। हाइपरटेंशन से पीड़ित किसी भी व्यक्ति को अपनी किडनी की गहन जांच करानी चाहिए और हाइपरटेंशन से किडनी प्रभावित नहीं हो रही हो इसकी जांच के लिए किडनी इमेजिंग करानी चाहिए।

बार-बार पेशाब जाना: पेशाब की मात्रा घट सकती है या फिर आपको विशेष तौर पर रात में बार-बार पेशाब करने जाना पड़ सकता है। इसके अलावा पेशाब में झाग आना या पेशाब व ब्लड में प्रोटीन लीक होना, त्वचा का रुखा होना व उसमें खुजली होना, पीठ में या पेट के निचले हिस्से में दर्द होना, एड़ियों, पैरों या टांगों में सूजन दिखना या आंखों के आसपास या नीचे सूजन आना (Periorbital edema) किडनी में समस्या होने के सबसे शुरुआती संकेतों में से एक है।

अपनी किडनी को कैसे स्वस्थ बनाए रखें

डॉक्टर अनुजा ने बताया कि किडनी की बीमारी होने के जोखिम से बचने और किडनी का स्वास्थ्य बेहतर बनाए रखने के कई तरीके हैं। जैसे अपने वार्षिक चेकअप में किडनी फंक्शन और यूरीन यानी पेशाब टेस्ट नियमित आधार पर कराते रहें। अगर आपको डायबिटीज़, हाइपरटेंशन, मोटापा है या फिर आपकी उम्र 60 वर्ष से अधिक है तो किडनी फंक्शन टेस्ट्स्, रीनल इमेजिंग और यूरीन एनालिसिस नियमित आधार पर होना चाहिए। अगर पेशाब में थोड़ी मात्रा में भी प्रोटीन आता है तो सुनिश्चित करें कि आप किसी नेफ्रोलॉजिस्ट से अवश्य मिलें। डायबिटीज़ के मरीज़ों को इसका विशेष तौर पर ध्यान रखना चाहिए। इसके अलावा भी इन चीजों का ध्यान रखें-

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